काव्यसंग्रह

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  • चौराहा

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    हर वक्त एक मोड़ दे जाता हैं, एक चौराहा…कहाँ जाए, ये तय करना होता हैं उलझन…
    उस उलझन में लफ़्ज दे जाते सहारा…
    फिर सफ़र हो जाता हैं आसान…
    ये चौराहा, कभी मेरा… कभी आपका…!

    – संगीता शेम्बेकर


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